उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में एक शादी समारोह ने उस दिन ऐसा मोड़ लिया, जिसने "सरकारी बनाम प्राइवेट नौकरी" की बहस को और हवा दे दी। बारात धूमधाम से लड़की के दरवाजे पर पहुंची, बैंड-बाजा और जयमाला तक सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन जैसे ही दुल्हन को पता चला कि दूल्हा सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि प्राइवेट सेक्टर में सिविल इंजीनियर है, माहौल में हलचल मच गई। दुल्हन ने फौरन सात फेरे लेने से इनकार कर दिया।
सरकारी नौकरी नहीं तो बियाह नहीं! प्राइवेट नौकरी वाला दूल्हा बेचारा शादी के लिए ही अनफिट हो गया। अब तो भौकालगुरु अपने युवा साथियों को सरकारी नौकरी करने के लिए प्रेरित कर रहे, नहीं तो लड़के कुँवारे ही रील्स और विडियो में दूसरों की शादियाँ एंजॉय करेंगे।
हालांकि, सरकारी नौकरी और वेकेंसी का क्या हाल है यह बेरोजगार साथियों या प्रयागराज और मुखर्जी नगर में घनघोर तैयारी में लीन साथियों से पूछा जा सकता है। सरकारी नौकरी एक ऐसा दर्द है जो प्राइवेट नौकरी करने वालों की जुबा से छलक ही आती है।
उत्तर प्रदेश और बिहार के लड़कों से इस बारे में सवाल कर के उनके दर्द को महसूस कर सकते हैं।
खैर अब तो बात शादी तक आ गयी है, जहां प्राइवेट कंपनी का सैलरी स्लिप भी काम नहीं करता।
दूल्हा, जो अपनी डिग्री और सवा लाख रुपये महीने की सैलरी पर गर्व कर रहा था, अचानक अपने फैसले पर सवाल करने लगा। स्थिति संभालने के लिए उसने तुरंत सैलरी स्लिप मंगवाई और दुल्हन के सामने पेश की, लेकिन दुल्हन ने साफ कहा, "पेंशन और स्थायी नौकरी चाहिए, ये प्राइवेट वाले भरोसेमंद नहीं होते।" दोनों पक्षों के समझदार लोग समझाने में जुटे रहे, लेकिन दुल्हन की जिद अडिग रही। अंततः बारात बिना दुल्हन के ही लौट गई, और दूल्हा अपनी सैलरी स्लिप के साथ खाली हाथ घर वापस आ गया।
यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जहां लोगों ने इसे लेकर खूब मजाक बनाया। मीम्स में कहा गया कि अब प्राइवेट नौकरी वालों को शादी के लिए 'नौकरी स्टैबिलिटी रिपोर्ट' और 'पेंशन प्लान' साथ लेकर चलना होगा। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या आज के दौर में रिश्ते भावनाओं पर कम और नौकरी की सुरक्षा पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं?



