एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन ने कर्मचारियों से हफ्ते में 90 घंटे काम करने की सलाह देकर मानो काम को जीवन का नया धर्म घोषित कर दिया है। रविवार को भी काम करने की उनकी इच्छा बताती है कि भगवान ने आराम का दिन गलती से बना दिया था। उनकी सलाह "पत्नी को कितनी देर तक निहार सकते हैं" सुनकर ऐसा लगता है जैसे निजी जीवन का कोई अस्तित्व ही नहीं होना चाहिए।
उनका चीनी लोगों के 90 घंटे काम करने वाले जज्बे को आदर्श बताना और अमेरिकी कामकाजी घंटों पर व्यंग्य करना एक नया मंत्र देता है – "श्रम योगा करो और आत्मज्ञान प्राप्त करो।" अगर उनकी बात मान ली जाए, तो ऑफिस में बिस्तर और खाना-पीने का इंतजाम करवा लेना चाहिए, ताकि कर्मचारी कभी घर न जाएं और ऑफिस को ही नया परिवार मान लें।
उनका दृष्टिकोण यह है कि काम से बड़ा धर्म कुछ नहीं। अगर आप घर पर समय बर्बाद कर रहे हैं, तो आप जीवन का उद्देश्य खो रहे हैं। इस सोच से लगता है कि अगली बार वह ऑफिस में सोने और जिंदा रहने की व्यवस्था भी सुझा देंगे।
जय श्रमयोग!



