बात करने से भौकाल नहीं बनता, बात से भौकाल का बुलबुला बनता है जो कुछ देर में फुट जाता है। लेकिन भौकाल जब मेहनत से बनता है तो दुनिया सलाम करती है !
शानदार जीत के साथ अपनी मेहनत से कुछ ऐसा ही भौकाल भारतीय महिला हॉकी टीम ने बनाई है। राजगीर, बिहार की धरती पर खिलाड़ियों के थिरकते पाँव और बाज जैसी नजर ने चीन को चकमा देते हुये गोल मार दिया और जीत ली वो बाजी जिसका इंतज़ार हम सभी को था। एक ऐतिहासिक जीत ...
भारतीय टीम ने अपनी शानदार खेल क्षमता और रणनीति से यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी जीती, जो भारतीय खेल प्रेमियों के लिए गर्व का पल साबित हुआ। भारत ने 2024 महिला एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। टीम के लिए एकमात्र गोल 31वें मिनट में दीपिका ने किया, जो इस टूर्नामेंट में उनका 11वां गोल था। दीपिका का यह गोल भारत की जीत की कुंजी बना, और उनकी शानदार प्रदर्शन ने टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
हमारी महिला टीम सिर्फ हॉकी नहीं खेलती, बल्कि संघर्ष और समर्पण का वो असली रूप प्रस्तुत करती है, जिसे देखकर सबको इंस्पायर होना चाहिए।
पिछले कुछ वर्षों में जहां भारतीय हॉकी को लेकर उम्मीदें धुंधली पड़ रही थीं, वहीं इस जीत ने सभी आलोचकों की बोलती बंद कर दी। न केवल खेल के मैदान पर, बल्कि सोशल मीडिया पर भी उनकी जीत के चर्चे हो रहे हैं। ट्विटर और इंस्टाग्राम पर ‘#IndianWomensHockey’ ट्रेंड कर रहा है, और लोग उनका हौसला बढ़ाने में लगे हुए हैं। राष्ट्रपति ने एक्स पर ट्वीट कर बधाई दी है।
और तो और, इस जीत ने खेल से जुड़े अन्य लोगों को भी प्रेरित किया। लोग कहते हैं, "अब बधाई के साथ-साथ हॉकी को खेल के रूप में भी सम्मान मिलने लगा है!" मगर असली मजा तो तब आएगा जब हर गांव और शहर में हॉकी के खिलाड़ी उभरेंगे, और वो गोल करने से पहले ‘धूम मचा देंगे’!
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