चुनावी-चोंचले

महाराष्ट्र और झारखंड में सियासी ड्रामा चरम पर

चुनाव का मौसम आते ही महाराष्ट्र और झारखंड में सियासी ड्रामा चरम पर है। प्रचार रैलियां अब "कौन बनेगा मुख्यमंत्री" का रियलिटी शो बन चुकी हैं। हर नेता अपनी सीट बचाने के लिए ऐसा प्रदर्...

महाराष्ट्र और झारखंड में सियासी ड्रामा चरम पर

चुनाव का मौसम आते ही महाराष्ट्र और झारखंड में सियासी ड्रामा चरम पर है। प्रचार रैलियां अब "कौन बनेगा मुख्यमंत्री" का रियलिटी शो बन चुकी हैं। हर नेता अपनी सीट बचाने के लिए ऐसा प्रदर्शन कर रहा है जैसे ऑस्कर की रेस में हो।

महाराष्ट्र में शिवसेना का दो धड़ों में बंटना किसी बॉलिवुड की मसाला फिल्म से कम नहीं लगता। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच सियासी कुश्ती ने दर्शकों को भरपूर मनोरंजन दिया है। रैलियों में ऐसे-ऐसे बयान सुनने को मिले कि जनता ने सोचा, "अगला चुनाव भाषण लेखकों के बीच होना चाहिए।"

झारखंड में हेमंत सोरेन अपने विरोधियों के साथ ऐसी शतरंज खेल रहे हैं, जिसमें हर चाल का जवाब एक नए विवाद से दिया जाता है। भाजपा का दावा है कि उन्होंने झारखंड के विकास की गाड़ी को "फुल स्पीड" दी है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि ये गाड़ी गलत दिशा में जा रही है।

एग्जिट पोल ने भी चुनावी सस्पेंस को और बढ़ा दिया है। महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना गठबंधन के लिए "डबल खुशी" की भविष्यवाणी की गई है, लेकिन झारखंड में तस्वीर उतनी साफ नहीं दिख रही। जनता एग्जिट पोल के आंकड़ों को ऐसे देख रही है, जैसे कोई क्रिकेट मैच का स्कोर चेक कर रहा हो।

23 नवंबर को नतीजे आएंगे, लेकिन उससे पहले नेताओं के चेहरे और समर्थकों के उत्साह का बदलता ग्राफ पहले ही दर्शकों को भरपूर मनोरंजन दे रहा है। एक मतदाता ने कहा, "हर बार हम सोचते हैं कि सियासत गंभीर काम है, लेकिन चुनाव प्रचार देखकर लगता है कि यह सबसे बड़ा कॉमेडी शो है।"

अब देखना यह है कि असली नतीजों के बाद कौन मुस्कुराएगा और कौन अगले चुनाव तक "धैर्य का व्रत" रखेगा।