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पाकिस्तानी भिखारी की "नो-फ्लाई लिस्ट" और पॉकेटमारों की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि!

पाकिस्तान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसकी "एक्सपोर्ट क्वालिटी" सिर्फ क्रिकेटरों और सूफी गानों तक सीमित नहीं है। मक्का-मदीना के पॉकेटमारों की सूची में 90% पाकिस्तानी नाम देखक...

पाकिस्तानी भिखारी की "नो-फ्लाई लिस्ट" और पॉकेटमारों की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि!

पाकिस्तान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसकी "एक्सपोर्ट क्वालिटी" सिर्फ क्रिकेटरों और सूफी गानों तक सीमित नहीं है। मक्का-मदीना के पॉकेटमारों की सूची में 90% पाकिस्तानी नाम देखकर सऊदी प्रशासन भी हैरान रह गया। लगता है, "आत्मनिर्भर पाकिस्तान" का सपना पूरा करने के लिए पाकिस्तानी भिखारियों ने इंटरनेशनल मार्केट में अपनी जगह बना ली है।

सऊदी अरब के सख्त कानूनों के बावजूद पाकिस्तानी भिखारी और पॉकेटमार ऐसी चपलता से काम कर रहे थे कि उन्हें पकड़ने के लिए शायद इंटरपोल की मदद लेनी पड़ती। लेकिन शुक्र है, पकड़े गए पॉकेटमारों ने खुद अपनी पहचान गुम होने नहीं दी—क्योंकि आखिरकार 90% का आंकड़ा तो गर्व करने लायक है!

अब, पाकिस्तान ने 4300 भिखारियों को "नो-फ्लाई लिस्ट" में डालकर वाकई इतिहास रच दिया है। एयरपोर्ट पर खड़े ये "नो-फ्लाई स्टार्स" शायद अब एयरलाइंस के क्रू को ट्रेनिंग देने लगें कि कैसे बिना टिकट विदेश जाने का प्लान बनाया जाए।

गृह मंत्री मोहसिन रजा नकवी ने कहा कि सऊदी अरब से मिली शिकायत के बाद ये कदम उठाए गए हैं। दिलचस्प बात ये है कि सऊदी नागरिकों को पाकिस्तान आने के लिए वीजा नहीं चाहिए, लेकिन पाकिस्तानियों को विदेश जाने के लिए अब इज्जत के साथ-साथ वीजा और गारंटी पत्र भी चाहिए होगा!

हज और उमराह के बहाने "इंटरनेशनल करियर"
हज और उमराह करने वाले भिखारियों के लिए यह बड़ा झटका है। आखिर गरीबों ने भी तो सोचा होगा, "हम धार्मिक स्थलों पर जाएंगे, खुदा से दुआ भी करेंगे और साथ ही टूरिस्ट से भीख मांगकर GDP में योगदान देंगे।"

भविष्य की संभावनाएं
अब जब पाकिस्तान अपने "नो-फ्लाई भिखारियों" के कारण चर्चा में है, तो क्या पता अगला कदम "पॉकेटमार प्रशिक्षण संस्थान" खोलने का हो। शायद ये संस्थान भविष्य में IMF से लोन लेने का नया तरीका भी खोज ले।

अंत में, एक सलाह
सऊदी अरब, UAE और बाकी खाड़ी देश पाकिस्तान से कह सकते हैं, "भाई, हम तुम्हारे मजदूर, इंजीनियर, और डॉक्टर तो झेल लेंगे, लेकिन भिखारियों और पॉकेटमारों से बख्श दो।" वहीं पाकिस्तान शायद गर्व से कहे, "हमारे लोग जहां भी जाते हैं, अपनी छाप छोड़कर आते हैं।"