केरल के तिरुर में आयोजित महोत्सव में उस वक्त हलचल मच गई जब हाथी श्रीकुट्टन ने अचानक अपने शांत स्वभाव को त्यागकर WWF रेसलिंग का लाइव प्रदर्शन शुरू कर दिया। भीड़ पर हमला करते हुए उसने लोगों को ऐसा पटक-पटककर फेंका कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। यह दृश्य देखकर भीड़ ने अपना धार्मिक उत्साह छोड़कर 'भागने' की कला का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।
श्रीकुट्टन शायद मन ही मन सोच रहा था, "हर साल मेरा सिर सजाते हो, घंटों खड़ा रखते हो और ऊपर से ढोल-नगाड़े बजाकर मुझे पागल बना देते हो। और मेरी राय? उससे किसी को मतलब ही नहीं।"
भीड़ जो अब तक हाथी को श्रद्धा से निहार रही थी, अचानक ‘सेल्फ-डिफेंस’ में लग गई। लोग भागते हुए सोच रहे थे, "अरे, पूजा का प्रसाद मिलेगा तो बाद में देखेंगे, पहले अपनी जान बचा लें।"
वन विभाग और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने की कोशिश की। लेकिन शायद श्रीकुट्टन ने यह सोच रखा था, "आज कोई मुझसे माफी मांगे बिना यहां से नहीं जाएगा।"
यह घटना हमें यह सिखाने आई है कि अगर आप किसी को लगातार सजावट का हिस्सा बनाकर उनकी भावनाओं की अनदेखी करेंगे, तो वो एक दिन अपना 'हाथी-पावर' दिखा ही देगा। श्रीकुट्टन ने जाते-जाते एक महत्वपूर्ण संदेश दिया:
"आइंदा हमें सजाने से पहले हमारी रजामंदी लेना, वरना अगला महोत्सव कहीं और मनाना!"



