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अब लोग मूवी कैसी है ये नहीं पूछेंगे, अब पूछेंगे- "कौन वाला पॉपकॉर्न लिया है?"

पॉपकॉर्न टैक्स पर सैटायर: "अब पॉपकॉर्न का स्वाद नहीं, टैक्स स्लैब देखिए!" अब जब आप किसी को मूवी देखने के लिए बुलाएंगे, तो सवाल होगा, "मूवी कैसी है?" की बजाय, "कौन वाला पॉपकॉर्न ल...

अब लोग मूवी कैसी है ये नहीं पूछेंगे, अब पूछेंगे- "कौन वाला पॉपकॉर्न लिया है?"

पॉपकॉर्न टैक्स पर सैटायर: "अब पॉपकॉर्न का स्वाद नहीं, टैक्स स्लैब देखिए!"

अब जब आप किसी को मूवी देखने के लिए बुलाएंगे, तो सवाल होगा, "मूवी कैसी है?" की बजाय, "कौन वाला पॉपकॉर्न लिया है?"

भारत सरकार ने पॉपकॉर्न पर अलग-अलग जीएसटी दरें लागू कर दी हैं, और सोशल मीडिया पर लोग इसे लेकर जमकर मज़ाक उड़ा रहे हैं। जहां एक तरफ 5% जीएसटी वाले नमकीन पॉपकॉर्न हैं, वहीं दूसरी तरफ 18% जीएसटी वाला कारमेल पॉपकॉर्न, जिसे अब 'चीनी का कन्फेक्शन' माना जाएगा।

नेटिज़न्स ने इस फैसले को "पॉपकॉर्न की राजनीति" करार दिया है और लिख रहे हैं, "अब तो पॉपकॉर्न खाते वक्त सोचना पड़ेगा, क्या मैं टैक्स बचा रहा हूँ या जीएसटी का भुगतान कर रहा हूँ?"

कुछ और लोग ये भी लिख रहे हैं, "सरकार ने पॉपकॉर्न के लिए जीएसटी तय किया है, अब लगता है कि टैक्स कलेक्टर पॉपकॉर्न का फ्लेवर देखकर टैक्स की दर तय करेंगे!"

तो अगली बार पॉपकॉर्न खाते वक्त, क्या आपने जीएसटी की स्लैब चेक की है? क्योंकि अब पॉपकॉर्न का स्वाद नहीं, टैक्स स्लैब सबसे ज्यादा मायने रखता है!