दशहरे से एक दिन पहले ही दिल्ली के पटेल नगर में रावण का पुतला जलकर राख हो गया। हर साल रावण को जलने के लिए दशहरे का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन इस बार लगता है कि लंकापति को इतनी जल्दी थी कि उसने मुहूर्त का इंतजार करना भी जरूरी नहीं समझा। बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट हुआ और रावण समय से पहले ही भस्म हो गया।
आयोजकों ने महीनों की मेहनत से रावण का पुतला तैयार किया होगा। योजना रही होगी कि दशहरे के दिन लोग जुटेंगे, आतिशबाजी होगी और तालियों के बीच रावण दहन किया जाएगा। लेकिन बिजली के तारों ने ऐसा सरप्राइज दिया कि न राम को धनुष उठाना पड़ा और न ही किसी को तीर चलाने की जरूरत पड़ी। रावण का दहन अपने आप हो गया!
अब आयोजकों को कौन समझाए कि उन्होंने पुतला दशहरे के लिए तैयार किया था, बिजली विभाग की परीक्षा के लिए नहीं। जनता भी अगले दिन मेले में रावण दहन देखने की उम्मीद लगाए बैठी होगी, लेकिन यहां तो शो शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। टिकट, आतिशबाजी और रामलीला सब अपनी जगह, रावण ने तो बिना किसी औपचारिकता के ही विदाई ले ली।
वैसे, इस घटना में रावण के अहंकार के लिए भी एक संदेश छिपा है। सोने की लंका का मालिक और बड़े-बड़े योद्धाओं से लड़ने वाला रावण आखिरकार बिजली के तारों के सामने टिक नहीं पाया। फर्क सिर्फ इतना है कि रामायण में उसका अंत भगवान राम के हाथों हुआ था, जबकि पटेल नगर में शुरुआती जानकारी के मुताबिक शॉर्ट सर्किट ने ही सारा काम कर दिया।
अब सवाल यह है कि रावण को जलने की इतनी जल्दी आखिर थी क्यों? दशहरा तो अगले दिन था, कम से कम मुहूर्त का इंतजार कर लेता, लंकापति!
