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जब बिहार का 'देसी जुगाड़' पहुँचा छत के पार, महिंद्रा बोले- भाई, इतनी भी 'कैपेबिलिटी' नहीं जाँचनी थी!

बिहार में देसी जुगाड़ का अनोखा नजारा देखने को मिला, जब एक शख्स ने अपनी Scorpio Classic को क्रेन से दो मंजिला मकान की छत पर पार्क कर दिया। आनंद महिंद्रा भी हैरान रह गए।

जब बिहार का 'देसी जुगाड़' पहुँचा छत के पार, महिंद्रा बोले- भाई, इतनी भी 'कैपेबिलिटी' नहीं जाँचनी थी!

भारत में 'पार्किंग की समस्या' से निपटने के लिए सरकारें बड़े-बड़े प्लान बनाती हैं, वैज्ञानिक बहुमंजिला पार्किंग का खाका खींचते हैं और शहर योजनाकार (टाउन प्लानर्स) सिर खुजाते रह जाते हैं। लेकिन बिहार के गोपालगंज ने वो कर दिखाया, जो नासा के इंजीनियर भी नहीं सोच सकते थे, सीधा दो मंजिला मकान की छत पर 'महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक' लैंड करा दी!

अब आप ही सोचिए, जब घर का मुखिया सात समंदर पार इज़राइल में बैठा हो, तो बेचारी स्कॉर्पियो को नीचे आवारा गायों, धूल-मिट्टी और चोरों की नजरों के भरोसे कैसे छोड़ा जा सकता था? गोपालगंज के यादव परिवार ने सोचा - 'गाड़ी का नाम क्लासिक है, तो पार्किंग भी एकदम क्लासी होनी चाहिए!' बस फिर क्या था, एक विशाल क्रेन बुलवाई गई, पड़ोसियों को ताली बजाने के लिए खड़ा किया गया और गाड़ी को सीधे पहली मंजिल से उठाकर दूसरी मंजिल की छत पर 'ड्रॉप' कर दिया गया।

इसे कहते हैं असली 'रॉयल सिक्योरिटी व्यवस्था'! अब ना तो कोई गाड़ी पर खरोंच मार सकता है, ना ही कोई साइड मिरर मोड़ सकता है। चोर अगर आए भी, तो पहले उसे दो मंजिला सीढ़ियाँ चढ़नी होंगी और फिर क्रेन किराए पर लाकर गाड़ी नीचे उतारनी पड़ेगी!

इस वीडियो के सोशल मीडिया पर छाने के बाद महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर चुटकी लेते हुए लिखा कि महिंद्रा वाले तो हमेशा से दावा करते थे कि उनकी स्कॉर्पियो 'कहीं भी चढ़ सकती है', लेकिन गोपालगंज वालों ने इस बात को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया और पार्किंग को सचमुच 'नेक्स्ट लेवल' पर पहुँचा दिया!

लेकिन हँसी-मजाक के बीच आनंद महिंद्रा को अपनी कार के वजन और घर की छत का ख्याल भी आ गया। उन्होंने हाथ जोड़कर जनता से अपील की - "भाइयों और बहनों, कृपा करके इसे घर पर दोहराने की कोशिश ना करें!" अब कौन समझाए कि जिस देश में लोग छत पर सीमेंट की टंकी की जगह 'स्कॉर्पियो' का ढांचा बनवा लेते हैं, वहाँ असली स्कॉर्पियो को छत पर पार्क कर देना कौन सी बड़ी बात है!
https://x.com/anandmahindra/status/2097329309862261191?s=20

फिलहाल, गोपालगंज के इस मकान को देखने के लिए आसपास के गांवों से लोग ऐसे पहुँच रहे हैं, मानो छत पर कार नहीं, बल्कि मंगल ग्रह से आया कोई यूएफओ (UFO) उतर गया हो। कुछ लोग तो अब यह सोचने लगे हैं कि जब अगली बार नई गाड़ी लेंगे, तो पहले आरसीसी (RCC) ढलाई वाली मजबूत छत बनवाएंगे।

सोशल मीडिया पर भी जनता दो गुटों में बंट गई है। एक गुट कह रहा है - "ये है बिहार का असली स्वैग!" तो दूसरा गुट चिंता में है कि अगर गलती से किसी ने रात में हैंडब्रेक हटा दिया या न्यूट्रल में गाड़ी छोड़ दी, तो सुबह चाय की चुस्की के साथ सीधे ड्रॉइंग रूम में स्कॉर्पियो की एंट्री होगी।

खैर, गोपालगंज के इस कारनामे ने एक बात तो साबित कर दी - भारत में जुगाड़ की कोई सीमा नहीं है और जब बात अपनी 'भौकाली गाड़ी' की सुरक्षा की हो, तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है!